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विकास के नाम पर पीने के पानी से भी दूर है राजस्थान के कई गांव।

रोज़ इन जगहों से न जाने कितने ही लोग अपने पशु-मवेशी,तथा दिनचर्या के अन्य ज़रूरी सामान के साथ साथ अपने घर को छोड़ने पर मजबूर हो रहें है।

जहां को एक ओर देश के गरीब और ग्रामीणों के विकास की बड़ी बड़ी बातें की जा रही है वही दूसरी और ग्रामीण इलाकों की ज़मीनी हक़ीक़त कुछ और कहानी बता रहे है।  हाल ही में ख़बरों की सुर्ख़ियों से पता चला है कि राजस्थान में धौलपुर ज़िले की कई ग्राम पंचायतों में लोग पानी की किल्लत का सामना कर रहें है।

बताया जा रहा है कि लोग धीरे धीरे इन क्षेत्रों से अब पलायन कर रहे है हर रोज़ इन जगहों से न जाने कितने ही लोग अपने पशु-मवेशी,तथा दिनचर्या के अन्य ज़रूरी सामान के साथ साथ अपने घर को छोड़ने पर मजबूर हो रहें है। बढ़ते पलायन की वजह से गौलारी ग्राम पंचायत में चंदरपुरा और थाने के गांव में सिर्फ चार लोग ही बचे हैं। कहा जा रहा है कि गांव से लगभग 100 से अधिक संख्या के लोग हर साल पलायन करते है।

मिली जानकारी के अनुसार पता चला है राजस्थान के बल्लापुरा गांव में लोग पीने के पानी के लिए भी मजबूर हो गए है। कई गांव की महिलाएं और बच्चों का लगभग आधा दिन सिर्फ घर का पानी ढोने में ही निकल जाता है। ग्रामीण लोगों का कहना है कि जिन ग्रामीण क्षेत्रों में राजनीतिक पहुंच नहीं है उन क्षेत्रों को पानी की पहुँच से दूर कर दिया गया है। यहां नलों में पानी चार दिन बाद आता है और वो भी सिर्फ 10 से 15 मिनट के लिये।

लोगों का कहना है कि जैसे ही गर्मी का मौसम शुरू होता है यहाँ के कुएँ,तालाब,आदि सभी सूख जाते है और लोग पानी की किल्लत से परेशान होने लगते है। सरकारें इन लोगों की ओर सिर्फ चुनावों के दिनों में ही रुख करती है  वोट लेने के बाद प्रशासन के लोग यहाँ दिखते ही नहीं है। जानकारी के अनुसार यहाँ पर लगभग 15 से 20 तक की आबादी पानी की किल्लत से परेशान है। चन्दरपुर गांव की हालत देखे तो पता लगता है कि एक समय यहाँ लगभग 200 से अधिक लोगों की आबादी थी जो अब घटकर महज़ 4 जनों पर अटकी हुई है। यहाँ पर पानी पीने के लायक भी नहीं बचा है।

गांव-वालों का कहना है कि उन्होंने अपनी इस परेशानी की शिकायत न जाने कितनी ही बार प्रशासन से की लेकिन कोई पुख्ता हल नहीं निकला जाता है। गांव के सिर्फ एक ही पोखर से गांव के तक़रीबन सारे मवेशी पानी पीते हैं इसी पानी को गांव के लोग पीने को मजबूर हैं।

इसी मामले में बसेड़ी विधानसभा से विधायक खिलाड़ीलाल बैरवा का कहना है कि पूरे इलाके में पार्वती बांध से पीने का पानी सप्लाई होता है. गर्मियों में समस्या होती है लेकिन गांव के लोग ही पाइप लाइन को बीच में से फोड़कर पानी चुरा लेते हैं. मेरी जन-सुनवाई में भी यह मुद्दा उठा और मैंने प्रशासन को ऐसे लोगों के खिलाफ एक्शन लेने के लिए कहा है।

आपको बता दें कि साल 2013 में पानी की पूर्ती के लिए 82 गांव में पार्वती बांध से पाइप लाइन बिछाई गयी थी उस समय शायद यह ध्यान नहीं रखा गया था कि इलाकों के मवेशियों की संख्या भी बहुत ज़्यादा है जिनके चारे-पानी का इंतज़ाम भी यहीं से किया जाना है यहाँ पर अब हाल ये है कि इंसानों के अलावा यहाँ पर पशुओं के लिए भी पीने का पानी नहीं बचा है जिसकी वजह से ही लोग यहाँ से पलायन करने पर मजबूर है।

जहां एक तरफ सरकार के बड़े बड़े भाषणों में ग्रामीण इलाकों के विकास की बातें कहीं जाती है तो वहीँ दूसरी और कई ग्रामीण क्षेत्रों में पीने का पानी भी नहीं है ऐसे में सरकार इन इलाकों को सुधारने के लिए कितनी जल्दी गौर करती है ये तो आने वाला वक़्त ही बताएगा। लेकिन हम उम्मीद करते है कि जल्द इन इलाकों को पानी की किल्लत से छुटकारा मिल जाएगा।

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