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समाजवादी नेता लोकबन्धु राजनारायण के जयन्ती समारोह में उठी सामूहिक मांग, प्रस्ताव में कहा गया कि राजनारायण को देने से बढ़ेगा भारत रत्न का सम्मान!

नई परम्परा की शुरुआत, श्रोताओं के बीच जाकर ओमप्रकाश सिंह, अरुण कुमार और महाबल मिश्र ने दिया वरिष्ठों को सम्मान और तेजस्वी कनिष्ठों को दुलार।

समाजवादी आंदोलन का वो नाम जो डा लोहिया की आवाज़ पर क्रांति की इबारत लिखने को प्रथम पंक्ति में अग्रसर रहते थे। राज नारायण जी बनारस के गंगापुर के रहने वाले थे, वो डा लोहिया और दादा चौधरी साहब मरहूम के साथियों में से थे। वो अपनी क्रांतिकारी और संघर्षशील शैली की वजह से प्रिय रहे। प्रखर समाजवादी होने के साथ साथ वो एक शानदार और जानदार वक्ता भी थे। आज जब देश में फासिस्ट ताक़त सत्ता में है। राजनीति का स्तर आज न्यूनतम स्तर पर है, तब हम सबको लोकबंधु राजनारायण जी का विशाल व्यक्तित्व एक ऐसा पाठ पढ़ाता है और हमको बताता है की लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए संघर्ष होना चाहिए और वही संघर्ष बदलाव लाता है। समाज के लिए लड़ाई लड़ी जानी चाहिए, समान अधिकार की बात होनी चाहिए। राजनारायण उस पंक्ति के नेता का नाम है जो अपने ज़माने की मज़बूत प्रधानमंत्री को ना सिर्फ़ हराने का माद्दा रखता था बल्कि सत्ता परिवर्तन और समाजवादी मूल्यों को संजोए हुए था! ऐसे व्यक्तित्व राजनीति में प्रेरणा और प्रोत्साहन प्रदान करते हैं! इसी क्रम में पूर्वांचल के एक समाजवादी नौजवान नेता रविभान सिंह ने लोकबंधु को जनमानस के समक्ष लाने का बीड़ा उठाया जिसके तहत लोकबंधु के गृह जनपद से समाजवादी आवाज के धार को तेज करने का प्रयास किया है।

वाराणसी। लोकबन्धु राजनारायण की 104 वीं जयंती के अवसर पर काशी विद्यापीठ सेंट्रल लाइब्रेरी के समिति कक्ष में आयोजित लोकबन्धु राजनारायण – आज, कल और आज संगोष्ठी में सर्वसम्मति से मांग की गई कि भारत सरकार लोकबन्धु राजनारायण को भारत रत्न से विभूषित करे।

संगोष्ठी में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित नरेन्द्र त्यागी ने इस सवाल को उठाया, विवेकानंद सिंह बाबुल, उदयभान राय और संजीव सिंह ने इसका समर्थन किया, अतिविशिष्ट अतिथि पूर्व सांसद महाबल मिश्र ने इस पर बल दिया, मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री ओमप्रकाश सिंह ने कहा कि इससे भारत रत्न का सम्मान बढेगा, मुख्यवक्ता पूर्व सांसद अरुण कुमार ने कहा कि संगोष्ठी के अध्यक्ष धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव हम सभी की ओर से इसे लेकर प्रस्ताव रखें जिसके क्रियान्यन में सेंट्रल लाइब्रेरी का समिति कक्ष लोकबन्धु राजनारायण को भारत रत्न प्रदान करने की सामूहिक मांग से गूंज उठा।

संगोष्ठी में कमोवेश सभी वक्ताओं ने लोकबन्धु राजनारायण के व्यकित्व और कृतित्व प्रकाश डाला और कहा कि अन्याय के खिलाफ अनवरत संघर्ष का ऐसा कोई दूसरा उदारण नहीं है। उनके दिखाए रास्ते पर चलकर ही भारत में लोकतन्त्र की रक्षा की जा सकती है। इस अवसर पर गुरुओं और वरिष्ठों की उपेक्षा पर अफसोस जाहिर किया गया और अच्छे भारत के निर्माण के लिए अपनी पुरानी परम्परा पर चलने के लिए बल दिया गया।इसे क्रियान्वित करने के उद्देश्य से मंच पर विराजमान मुख्य अतिथि ओमप्रकाश सिंह, मुख्यवक्ता अरुण कुमार और अतिविशिष्ट अतिथि महाबल मिश्र श्रोताओं के बीच पहुँच गए और वहाँ बैठे लोकबन्धु राजनारायण के संघर्ष के गवाह रहे साथियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।

इस अवसर पर उन साथियों को भी स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया जो लोकबन्धु के दिखाए गए रास्ते पर चल रहे हैं या उनके विचारों को आम जनतक पहुंचाने में लगे हैं। श्रोताओं के बीच सम्मान पाने वालों में सर्वश्री अनिरुद्ध नारायण सिंह, कुँवर सुरेश सिंह, प्रदीप कुमार, एके लारी, ब्रजेश कुमार शर्मा, विजय कृष्ण, जावेद अख्तर, अभय श्रीवास्तव, यशोवर्धन सिंह, डाक्टर दिलीप कुमार गौतम, सीपी राय और रमेश यादव आदि प्रमुख रखे।

सम्मान की इस नई परम्परा के सम्मान में संयोजक रविभान सिंह और सह संयोजक आदर्श सिकरवार की अपील पर समूर्ण कक्ष तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा। संगोष्ठी में विषय रखा, वरिष्ठ छात्रयुवा नेता डाक्टर शम्मी कुमार सिंह ने। इसे लेकर विमर्श के बीच ही लोकबन्धु राजनारायण – कल, आज और कल स्मारिका का विमोचन भी हुआ। संगोष्ठी की अध्यक्षता लोकतन्त्र सेनानी कल्याण समिति के संयोजक धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव तथा सन्चालन कार्यक्रम संयोजक रविभान सिंह ने किया। बीएचयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष सन्त सूबेदार सिंह के भावुक संस्मरण के साथ संगोष्ठी का समापन हुआ।

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