
करोड़ों हिंदुओं ने जब 22 जनवरी 2024 को टीवी पर राम लला की प्राण प्रतिष्ठा देखी थी, तो आंखें भर आई थीं। घरों में दीये जले। मंदिरों में घंटियां बजीं। बुजुर्ग माताओं ने अपने कांपते हाथों से माथा टेका और कहा अब मरना भी नहीं है, राम का मंदिर देख लिया। दशकों का इंतजार, सैकड़ों बलिदान, लाखों लोगों की तपस्या, सब उस एक पल में पूरे हुए लग रहे थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब मंदिर का उद्घाटन किया, तो देश की आंखें नम थीं और सीना गर्व से भरा था। लेकिन आज, मात्र दो साल बाद, वही पावन मंदिर एक ऐसे दर्दनाक सवाल के केंद्र में है जिसे सुनकर दिल बैठ जाता है
क्या राम के घर में ही, उनकी आंखों के सामने, उनके भक्तों के चढ़ावे की लूट हो रही थी?
विशेष जांच टीम (SIT) की रिपोर्ट और उसके बाद दर्ज FIR ने जो तस्वीर सामने रखी है, वो सिर्फ एक प्रशासनिक विफलता की कहानी नहीं है। यह उन करोड़ों भक्तों के साथ धोखे की कहानी है, जिन्होंने अपनी मेहनत की कमाई, अपने गहने, अपने सपने सब राम के चरणों में अर्पण किए थे।
एक आंदोलन जो खून और आंसुओं से सींचा गया था, राम जन्मभूमि आंदोलन कोई रातोरात उठी मांग नहीं थी। यह एक पीढ़ी की पूजा थी चार दशक की तपस्या। 1980 के दशक में जब यह आंदोलन जोर पकड़ा, तो लाखों लोग सड़कों पर उतरे। गांव-गांव से कारसेवक निकले। उनमें से कई पढ़े-लिखे नहीं थे, कईयों के पास खाने का ठिकाना नहीं था लेकिन राम के प्रति आस्था ऐसी थी कि घर-परिवार छोड़कर चल दिए।
6 दिसंबर 1992 वह दिन इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गया। बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद देशभर में जो तनाव फैला, उसने हजारों परिवारों को तोड़ा। लेकिन उन कारसेवकों के लिए यह पल आस्था की एक नई शुरुआत था। उन्होंने जो किया, उसकी कीमत भी चुकाई कानूनी मुकदमे, जेल, समाज की नजरें। फिर आए वो साल जब अदालतों में फैसले की उम्मीद टिकी थी। 2019 में सर्वोच्च न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया और भूमि राम जन्मभूमि ट्रस्ट को सौंप दी गई। देशभर में जश्न मना। निर्माण शुरू हुआ। हजारों मजदूर, कारीगर, शिल्पकार सबने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया। दान में भी किसी ने पीछे नहीं देखा। एक छोटे कस्बे की बूढ़ी माँ ने अपनी बचत के ₹500 भेजे। NRI ने लाखों डॉलर दिए। एक किसान ने फसल बेचकर सोने की ईंट अर्पण की। हर भक्त के दान में एक कहानी थी श्रद्धा की, समर्पण की, प्रेम की। उस दान की रखवाली जिन हाथों में थी वही हाथ खाली करने में लगे थे।
SIT का खुलासा : नोट कपड़ों में, रकम गोबर के नीचे
SIT की अंतरिम रिपोर्ट जब सामने आई, तो हर पढ़ने वाले का माथा ठनका। मंदिर परिसर में 14 दान पात्र लगाए गए थे। रोज उनमें लाखों रुपये जमा होते थे नकद, सोना, चांदी, हीरे, राम शिलाएं। दान पात्र खोलने और गिनती करने का काम कर्मचारियों को सौंपा गया था। लेकिन वे कर्मचारी गिनती कम करते, और जेब में भर लेते।
CCTV फुटेज में 70 से ज्यादा ऐसे मौके दर्ज हुए जब नोट कपड़ों में छुपाए गए कमीज की बाहों में, धोती की तहों में, पायजामे की जेबों में। बाथरूम में नोटों के बंडल रखे गए। काम खत्म होने के बाद बाहर जाकर आपस में बांट लिए गए।यह सब राम की मूर्ति के सामने हो रहा था।
जब पुलिस ने छापा मारा तो जो मिला, वो किसी फिल्म से भी ज्यादा नाटकीय था एक आरोपी के घर में गाय के गोबर के ढेर के नीचे ₹10 लाख मिले। शायद सोचा था, पवित्र चीज के नीचे रखेंगे तो कोई नहीं ढूंढेगा। अब तक आठ लोग गिरफ्तार हो चुके हैं :
लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, मनीष यादव, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू (जो चंपत राय के पूर्व निजी ड्राइवर रहे हैं), सुभाष चंद्र श्रीवास्तव और करुणेश पांडे। इनके पास से कुल ₹79.85 लाख नकद बरामद हुए। इन पर भारतीय न्याय संहिता के तहत चोरी, आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के मामले दर्ज हैं। और सबसे हैरान करने वाली बात इनमें से कुछ आरोपी महज ₹18,000 से ₹20,000 मासिक वेतन पर काम करते थे। लेकिन जांच में उनके नाम पर होटल, हॉस्टल, प्लॉट और महंगे वाहन दर्ज पाए गए।
कुल गबन की रकम का अनुमान है ₹5 करोड़ से ₹200 करोड़ तक। कुछ रिपोर्ट्स में सोने-चांदी से बनी करीब 1,250 राम शिलाओं और बहुमूल्य आभूषणों के गायब होने का भी जिक्र है। पर असली आंकड़ा तो तब निकलेगा जब पूरी जांच होगी और वो आंकड़ा शायद और भी बड़ा हो।
वो जिन्होंने राम के लिए घर छोड़ा था उनका दर्द
राम जन्मभूमि आंदोलन के पुराने कारसेवक संतोष दुबे जो बाबरी विध्वंस मामले में खुद आरोपी रहे और आज हिंदू धर्म सेना के प्रमुख हैं — उनकी आवाज सुनकर मन भारी हो जाता है। 16 जून को उन्होंने राम जन्मभूमि कोतवाली में तहरीर दी और नामजद FIR की मांग उठाई। वे कहते हैं —
“मैं उस वक्त जवान था जब राम मंदिर आंदोलन से जुड़ा। घर छोड़ा, माँ-बाप की परवाह नहीं की। बच्चों को याद करके सो जाता था, पर अयोध्या नहीं छोड़ी। अपने साथियों को गोली खाते देखा है मैंने। कुछ तो मेरी गोद में तड़पे। मैं खुद घायल हुआ — और वो सब इसलिए नहीं था कि एक दिन भगवान राम की आंखों के सामने उनके दर्शन करने आए भक्तों का चढ़ावा लूटा जाए। रोज एक करोड़ तक का चढ़ावा आता था मंदिर में नकद, सोना, चांदी, हीरे, जवाहरात, राम शिलाएं। और ये सब धीरे-धीरे गायब होता रहा। ट्रस्ट में बैठे लोग चंपत राय बंसल, अनिल मिश्रा, गोपाल राव और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू ये वही लोग हैं जिन पर सवाल उठाए जाने चाहिए। SIT की जांच? वो तो दिखावा है। आज तक किसी बड़े का नाम क्यों नहीं लिया?
मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को पत्र लिख चुका हूं। कोर्ट में याचिका दायर करूंगा। पॉलीग्राफ टेस्ट होना चाहिए एक-एक का। राम नाम की लूट है यह। ‘लूट सके तो लूट’ अब राम धन की लूट हो रही है। भगवान राम की आंखें सब देख रही हैं। और जो देख रहे हैं, वो इतिहास में दर्ज होगा।
यह आस्था पर डकैती है। इस डकैती का जवाब सिर्फ न्याय से मिलेगा।”
दुबे ने यह भी कहा कि यह तो बस हिमशैल की नोक है नीचे जमीन घोटाले और कई अन्य अनियमितताएं भी दबी पड़ी हैं जिनकी जांच अभी तक ठीक से नहीं हुई।
विपक्ष का हमला : एक-एक नेता की आवाज
अखिलेश यादव : “BJP अब ‘भचप’ है”
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मामले को सीधे BJP और RSS के दरवाजे तक पहुंचाया। उनके शब्दों में धार भी थी और व्यंग्य भी “सनातनियों को बहुत गहरी ठेस पहुंची है। जिन लोगों ने राम मंदिर के नाम पर वोट मांगे, जिन्होंने इसे अपनी सबसे बड़ी राजनीतिक उपलब्धि बताया आज उन्हीं के शासन में राम के घर में चोरी हो रही है।
BJP अब ‘भचप’ कहलाएगी भ्रष्टाचार, चंदा, चोरी और चालबाजी। CCTV का ‘CC’ अब ‘चंदा चोरी’ और ‘चढ़ावा चोरी’ हो गया है। सनातन धर्म की आड़ में पूरा बिजनेस चल रहा है। RSS और BJP से जुड़े लोग इस लूट में शामिल हैं। योगी सरकार चुप क्यों है? SIT किसकी जांच करेगी क्या उसकी जांच होगी जो ट्रस्ट चला रहे हैं? अधिकारियों की भी SIT होनी चाहिए।
हम सनातन धर्म के दुश्मन नहीं हैं हम धर्म की रक्षा चाहते हैं। लेकिन धर्म की आड़ में यह लूट बंद होनी चाहिए। असली मास्टरमाइंड कौन है वो सवाल पूछने की हिम्मत कोई क्यों नहीं जुटाता?”
अखिलेश ने मंदिर निर्माण के दौरान जमीन घोटाले का भी जिक्र किया और मांग की कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
मल्लिकार्जुन खड़गे : “₹5,000 करोड़ कहां गए?”
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आंकड़ों की भाषा में वार किया “राम मंदिर के नाम पर देश से हजारों करोड़ रुपये जमा हुए। आम आदमी ने दिल खोलकर दिया पांच रुपये से लेकर पांच लाख तक। लेकिन उस दान का हिसाब कहां है? कोई पारदर्शिता नहीं, कोई सार्वजनिक ऑडिट नहीं। हम अनुमान लगा रहे हैं कि ₹5,000 करोड़ से ज्यादा का दुरुपयोग हुआ है। यह देश के उन गरीब भक्तों के साथ धोखा है जिन्होंने अपनी रोटी का पैसा राम के लिए दिया था। BJP सरकार को जवाब देना होगा यह पैसा कहां गया? क्या इसका इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए हुआ? या सत्ता के करीबी लोगों की जेबें भरी गईं? देश जानना चाहता है।” खड़गे ने संसद में इस मामले पर बहस की मांग भी की है।
राहुल गांधी : “यह भगवान के साथ धोखा है” कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस मामले पर तीखा बयान दिया “भारत में करोड़ों लोग राम को सिर्फ एक मूर्ति नहीं मानते वो उनकी आत्मा हैं, उनकी सांस हैं। उन भक्तों ने जब अपना पैसा राम के चरणों में चढ़ाया, तो उनके दिल में सिर्फ श्रद्धा थी।
जो लोग उस श्रद्धा को लूट रहे थे वे सिर्फ कानून नहीं तोड़ रहे थे। वे करोड़ों दिलों को तोड़ रहे थे। यह भगवान के साथ धोखा है, और यह उन लोगों के साथ धोखा है जिन्होंने BJP पर भरोसा किया था।
सरकार को CCTV के भरोसे मत छोड़ो इस जांच को। CBI जांच हो, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में। और जब तक यह नहीं होता PM मोदी को देश को जवाब देना चाहिए।”
प्रियंका गांधी वाड्रा : “माँ का दर्द समझो” प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस मामले पर जो कहा, वो सीधे भावनाओं को छू गया
“मैं उन माताओं के बारे में सोच रही हूं जिन्होंने पूरी जिंदगी बचत की और राम मंदिर में चढ़ाई। जिन्होंने सोने की चूड़ियां उतारकर दीं। जिन्होंने बेटे की तनख्वाह से बचाकर भेजा। उन माताओं को आज किसी ने यह नहीं बताया कि उनका पैसा किसी की जेब में गया। किसी के होटल की नींव बना। किसी की गाड़ी में भरा। यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं है। यह उन बेटों-बेटियों का दिल तोड़ना है जो सोचते थे कि उनकी माँ का दान सीधे राम के चरणों में पहुंचा। इस दर्द का जवाब सिर्फ सख्त सजा है और कुछ नहीं।”
समाजवादी जनता पार्टी चन्द्रशेखर के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री संतोष कुमार सिंह ने कहा
“यह वही लोग हैं जो चुनाव में धर्म का नाम लेते हैं और जीत के बाद धर्म की कमाई लूटते हैं। पिछड़े, दलित, गरीब इन्होंने भी राम मंदिर में दान किया था। आज उन्हें जवाब मिलना चाहिए।
यूपी सरकार को अगर सच में राम से प्रेम है तो एक-एक पैसे का हिसाब सार्वजनिक करो। पूरा ऑडिट खोलो। जो भी दोषी है चाहे वो ट्रस्टी हो या ड्राइवर सब को बराबर सजा मिले।”
जयंत चौधरी (RLD) : “पारदर्शिता की मांग”
राष्ट्रीय लोक दल के अध्यक्ष जयंत चौधरी ने संयमित लेकिन तीखे शब्दों में कहा “राम मंदिर ट्रस्ट एक सार्वजनिक संस्था है। उसे सार्वजनिक जवाबदेही से ऊपर नहीं रखा जा सकता। हम मांग करते हैं कि हर वर्ष का दान-खर्च का पूरा विवरण वेबसाइट पर सार्वजनिक हो। अगर आस्था सच्ची है तो पारदर्शिता से डर कैसा?”
BJP का बचाव : “साजिश है, कार्रवाई होगी” सत्ता पक्ष की ओर से भी प्रतिक्रियाएं आईं। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के करीबियों ने कहा कि SIT पूरी निष्पक्षता से काम कर रही है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
BJP प्रवक्ता ने विपक्ष पर पलटवार किया “जो लोग राम मंदिर का विरोध करते रहे, वही आज उसके नाम पर राजनीति कर रहे हैं। यह एक प्रशासनिक मामला है जिसमें कार्रवाई हो रही है। इसे सांप्रदायिक रंग देना देश के साथ धोखा है।”
संत समाज की चुप्पी और कुछ आवाजें जहां विपक्ष जोर-शोर से बोल रहा है, वहीं देश के अधिकांश बड़े संत-महात्मा अभी तक खामोश हैं। यह खामोशी भी एक सवाल है। हालांकि कुछ संतों ने नाम न लेने की शर्त पर कहा “भगवान के घर में चोरी हो और हम चुप रहें यह हमारे धर्म के खिलाफ है। ट्रस्ट को जवाब देना चाहिए, नहीं तो भक्तों का भरोसा टूटेगा।”
अयोध्या के कुछ स्थानीय पुजारियों और महंतों ने भी CBI जांच की मांग की है।
वो चढ़ावा जो गया और वो सवाल जो रहे गए एक आंकड़ा समझिए मंदिर में रोज औसतन ₹50 लाख से ₹1 करोड़ तक का चढ़ावा आता था। अगर ₹5 करोड़ का भी गबन हुआ, तो यह पांच से दस दिनों का चढ़ावा है। लेकिन अगर ₹200 करोड़ का अनुमान सही है तो यह महीनों, शायद सालों की लूट है। और सोने-चांदी की राम शिलाओं का क्या? जिन्हें भक्त ने अपने हाथों से तराशकर, अपने गांव से लाकर, भगवान को समर्पित किया था वे शिलाएं आज कहां हैं? किसी बाजार में? किसी तिजोरी में?
SIT के सामने चुनौतियां भी कम नहीं 200 से ज्यादा कर्मचारियों से पूछताछ बाकी है। मंदिर परिसर में CCTV के ब्लाइंड स्पॉट हैं कई जगह कैमरे नहीं थे। बैंक जमा की प्रक्रिया में भारी लापरवाही बरती गई। कर्मचारी वेरिफिकेशन ढंग से नहीं हुई थी — कई आरोपी बिना पूरी जांच के नियुक्त हो गए थे।
सोशल मीडिया : भक्तों की पीड़ा और गुस्सा X (Twitter), Instagram और YouTube पर #RamMandirLoot और #ChadhavaChori ट्रेंड कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा “मेरी दादी ने अपनी पेंशन से ₹2,000 भेजे थे राम के लिए। आज जब यह खबर उन्हें बताई तो वो रो पड़ीं। मुझे नहीं पता किस पर गुस्सा करूं।”
एक और पोस्ट “जिस मंदिर के लिए लोगों ने जान दी, उसी मंदिर में उनकी आस्था लूटी जा रही है। यह पाप है।”
कुछ लोगों ने सवाल भी उठाया “क्या यह सिर्फ इन आठ लोगों का काम था? या ऊपर तक कोई जुड़ा है? SIT को पूरी सच्चाई निकालनी होगी।”
नाम पर कलंक नहीं यह विवाद सिर्फ कुछ कर्मचारियों की बेईमानी की कहानी नहीं है। यह एक बड़ी चेतावनी है कि जब भी किसी धार्मिक संस्था में जवाबदेही नहीं होती, तो लूट का रास्ता खुल जाता है।राम मंदिर सिर्फ पत्थर और सीमेंट की इमारत नहीं है। यह उन करोड़ों भारतीयों की आस्था की इमारत है जिन्होंने इसे अपनी भावनाओं से सींचा है। उस आस्था का सम्मान करना अब सरकार की, ट्रस्ट की, और पूरे समाज की जिम्मेदारी है। जरूरत है पूर्ण पारदर्शी और स्वतंत्र ऑडिट हर रुपये का, हर ग्राम सोने का हिसाब सार्वजनिक हो। पक्ष और विपक्ष सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में CBI जांच SIT पर लोगों का भरोसा तब होगा जब उसे किसी स्वतंत्र संस्था की निगरानी मिले।दोषियों को त्वरित और कड़ी सजा सिर्फ छोटे कर्मचारी नहीं, अगर ऊपर तक कोई जुड़ा है तो वो भी कठघरे में आए। हर भक्त को रसीद मिले, ट्रैकिंग हो, और पूरा हिसाब ऑनलाइन उपलब्ध हो।
स्वतंत्र ट्रस्टी बोर्ड जिसमें शंकराचार्य हो आरएसएस मुक्त राजनीतक दल से दूर, धर्माचार्य, कानून विशेषज्ञ और नागरिक समाज के प्रतिनिधि हों।
राम देख रहे हैं रामायण में एक प्रसंग है। जब सोने की लंका जल रही थी,
तब हनुमान ने कहा था — “जहां राम का नाम है, वहां झूठ टिक नहीं सकता।”
आज अयोध्या में राम का नाम है। उनका मंदिर है। उनकी मूर्ति है। और उनकी आंखें भी हैं जो हुआ, वो सामने आ गया। जो छुपा है, वो भी सामने आएगा। करोड़ों भक्तों की आस्था को ठेस जरूर लगी है ,लेकिन आस्था टूटती नहीं। वो और मजबूत होती है जब न्याय मिलता है। आस्था को राजनीति का हथियार मत बनने दीजिए। राम के नाम पर हुई इस चोट का जवाब नफरत से नहीं न्याय से मिलेगा।
Theजनमत.कॉम इस मामले पर लगातार नजर रखे हुए है। अगर आप इस मामले से जुड़ी कोई जानकारी साझा करना चाहते हैं तो हमसे संपर्क करें। जय श्री राम।



